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Wilfredo Pereto

विल्फ्रेडो पैरेटो (1848-1923)

पैरेटो ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द माइंड एण्ड सोसाइटी' (The Mind and Society) के अंतर्गत 'अभिजनों के परिभ्रमण की अवधारणा' (Circulation of Elites Concept) को स्पष्ट किया है। इस अवधारणा के द्वारा पेरेटो ने एक और सामाजिक संरचना के अंतर्गत विभिन्न वर्गों की प्रकृति को स्पष्ट किया तथा दूसरी ओर विभिन्न वर्गों की स्थिति में होने वाले परिवर्तन के आधार पर सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया का विश्लेषण किया है।

इस प्रकार पैरेटो द्वारा प्रतिपादित 'अभिजनों के परिभ्रमण की अवधारणा' सामाजिक परिवर्तन के सिद्धांत की स्पष्ट व्याख्या करती है। उसका यह सिद्धांत 'संभ्रान्त जनों के हेरफेर का सिद्धांत' है। पैरेटो ने बताया कि प्रत्येक समाज में विभिन्न वर्गों के बीच ऊंचे-नीचे स्तरों का स्पष्ट संस्तरण पाया जाता है। 

प्रथम स्तर : यह सर्वोच्च वर्ग का स्तर होता है जो अपनी चतुराई, कुशलता और प्रभाव के द्वारा सत्तापर अपना अधिकार कर लेता है, इसे शासकीय अभिजात वर्ग (Governing Elite) कहा जाता है।

दूसरा स्तर: इसमें वे अभिजन आते हैं जो अपने-अपने कार्य क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित स्थान रखते हैं। किंतु शासन में इनकी कोई प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं होती। इसे गैर-शासकीय अभिजात वर्ग (Non-GoverningElite) कहा जाता है।

तीसरा स्तर: यह निम्न तथा गैर अभिजात वर्ग का स्तर होता है जिसमें श्रमिकों, सामान्य कर्मचारियों तथा अपनी मेहनत से जीवनयापन करने वाले सामान्य व्यक्तियों को सम्मिलित किया जाता है।

पैरेटो का कहना है कि प्रत्येक समाज में साधारण मनुष्यों और अभिजनों की ऊपरी स्तरों से निचली स्तरों की ओर तथा निचले स्तरों से ऊपरी स्तरों की ओर बढ़ती हुई क्रियाशीलता निरन्तर चलती रहती है जिसकेपरिणामस्वरूप एक ओर सत्ता संभालने वाले वर्गों में निकृष्ट तत्वों तथा दूसरी ओर अधीनस्थ वर्गों में उत्कृष्ट या श्रेष्ठ तत्वों का विकास होता रहता है। अभिजन वर्ग की विशेषताओं में समय-समय पर परिवर्तन होते रहते हैं जिनके कारण विभिन्न अभिजन वर्गों की रचना तथा क्रियाशीलता में परिवर्तन होते रहते हैं। जब ये परिवर्तन उस सीमा तक पहुँच जाते हैं कि कुछ संभ्रात लोगों (शासक वर्ग) का स्थान दूसरे संभ्रांत (गैर शासक संभ्रात) लोग ले लेते हैं तब राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो जाती है। अधिक सरल शब्दों में अभिजन वर्ग के भीतर सत्तारूढ़ विशिष्ट वर्ग (प्रथम स्तर) और गैर सत्तारूढ़ विशिष्ट वर्ग (द्वितीय स्तर) के बीच निरन्तर संघर्ष चलता रहता है। समय और परिस्थितियों के परिवर्तन के साथ गैर सत्तारूढ़ विशिष्ट वर्ग, सत्तारूढ़ विशिष्ट वर्ग को सत्ताच्युत कर देता तथा स्वयं सत्तारूढ़ हो जाता है। इस प्रक्रिया को विशिष्ट वर्गों की अदला बदली (Circulation of Elites) कहा जाता है। इसी आधार पर पैरेटो ने 'इतिहास को कुलीन तंत्रों का कब्रिस्तान' कहा है।

पैरेटो का कहना है कि संभ्रांत वर्ग अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तार्किक, अतार्किक, विवेकशील या अविवेकशील किसी भी प्रकार का कार्य कर सकते हैं। उसने संभ्रातों की कुछ आवश्यक विशेषताओं का उल्लेख किया है जैसे संभ्रातों में जोखिम झेलने की प्रवृत्ति होनी चाहिए, आविष्कार की क्षमता होनी चाहिए. स्थिति को सुरक्षित रखने की लगन होनी चाहिए, अभिव्यक्ति की शक्ति होनी चाहिए, मेलजोल, चारित्रिक दृढ़ता तथा कामेच्छा की प्रवृत्ति जिन्हें वह विशिष्टताएँ (Residues) कहता है। उसका कहना है कि इन्हीं विशिष्टताओं को आधार बनाकर अभिजन वर्ग के सदस्य ऊपर उठ सकते हैं या अपनी स्थिति को बनाए रख सकते हैं। उसने लिखा है कि. "सिंह के स्वभाव वाले लोग स्थिर परिस्थितियों में असाधारण दृढ़ता का परिचय देते हैं जबकि लोमड़ी के स्वभाव वाले लोग नई सूझ-बूझ के बल पर बदली हुई परिस्थितियों के साथ समायोजन करने में निपुण होते हैं। "

पैरेटो ने उपरोक्त दो विशेषताओं यथा संभ्रांतों में जोखिम झेलने की प्रवृत्ति तथा उनकी आविष्कार की क्षमता के आधार पर 'नवनिर्माण तथा संगठन का सिद्धांत' प्रतिपादित किया। पैरेटो ने कुछ व्युत्पत्तिमूलक विशेषताओं (जैसे आग्रह. सत्ताधारियों से निवेदन, भावनाओं तथा सिद्धांतों की दुहाई और मौखिक प्रमाण) अथवा उन विधियों का उल्लेख भी किया है जिनके द्वारा क्रियाओं को तर्कयुक्त कार्यों का रूप प्रदान किया जाता है। 

अभिजात वर्ग की परिभ्रमण प्रक्रिया

शासकीय तथा गैर शासकीय अभिजनों की स्थिति में नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे परिभ्रमण किस प्रकार होता है? 

1. पहली दशा यह है कि शासक वर्ग अपने वर्ग में गैर शासकीय अभिजन वर्ग के कुशल और प्रभावशाली वर्ग के लोगों को आने से रोक दें। 2. दूसरी दशा यह है कि स्वयं सत्ता में बने रहने के लिए वह शक्ति का कम से कम उपयोग करना आरम्भ कर दे।

पैरेटो के अनुसार शासकीय अभिजन वर्ग द्वारा इन दोनों में से चाहे किसी भी विधि का उपयोग किया जाए, इतना अवश्य है कि धीरे-धीरे इस वर्ग की अभिरुचि विभिन्न प्रकार की कलाओं और भौतिक सुख सुविधाओं में बढ़ने लगती है तथा कुछ समय बाद यह शासक वर्ग अधिक उदार तथा सहनशील प्रकृति के हो जाते हैं। इनकी सहनशीलता की प्रकृति इतनी बढ़ जाती है कि ये जन सामान्य को नियंत्रित करने के लिए शक्ति का उपयोग उस सीमा तक नहीं कर पाते जहाँ तक कि सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है।

जब शासकीय अभिजन में इस प्रकार के परिवर्तन होते हैं तब गैर शासकीय अभिजन (Non Governing Elite) जिन्हें पैरेटो शेर प्रकृति (Lion Nature) का कहता है, शासकीय अभिजनों, जो कि लोमड़ी प्रकृति (Fox Nature) के होते हैं के विरुद्ध जनसाधारण को प्रेरित और संगठित करने लगता है। 

यदि गैर शासकीय अभिजनों को जनसामान्य का समर्थन मिल जाता है तो वे शासकीय अभिजनों का स्थान ले लेते हैं तथा अनेक शासकीय अभिजन सत्ता से अलग होकर निचली स्थिति में आ जाते हैं।

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